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सुदर्शन टीवी का शो देखने से SC का इनकार, केंद्र से पूछा- क्‍या इसमें हस्‍तक्षेप कर सकते हैं?

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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट ने सुदर्शन न्‍यूज के शो ‘बिंदास बोल’ के कार्यक्रम को देखने से इनकार कर दिया है. सोमवार को शो के कार्यक्रम को लेकर हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा क्या कानून के हिसाब से वो इस मामले में हस्तक्षेप कर सकती है? सुनवाई के दौरान, जस्टिस केएम जोसेफ ने कहा कि आज कोई ऐसा कार्यक्रम है जो आपत्तिजनक नहीं है? कानून के अनुसार सरकार इसमें हस्तक्षेप कर सकती है? रोजाना लोगों की आलोचना होती है, निंदा होती है और लोगों की छवि खराब की जाती है?

मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल से पूछा कि सरकार ने 4 एपिसोड के टेलीकास्ट की इजाजत देने के बाद प्रोग्राम पर नजर रखी? इंग्लैंड में प्रसारण योजना का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा, वहां पर पूर्व प्रसारण की योजना नहीं है, लेकिन भारत में हमारे पास अन्य क्षेत्राधिकार हैं. हमारे पास पूर्व-प्रकाशन प्रतिबंध के लिए शक्ति है यदि सरकार इसे लागू नहीं करती है.

शीर्ष अदालत सुदर्शन चैनल के कार्यक्रम ‘बिंदास बोल’ के खिलाफ शिकायत पर सुनवाई कर रही है. कार्यक्रम के प्रोमो में दावा किया गया है कि वह ‘प्रशासनिक सेवा में मुस्लिमों की घुसपैठ की साजिश’ का बड़ा खुलासा करेगा. वहीं, प्रधान संपादक के जरिये दाखिल हलफनामे में सुदर्शन टीवी ने कहा, ‘जवाब देने वाले प्रतिवादी (सुरेश चव्हाणके) ने ‘यूपीएससी जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल किया है क्योंकि विभिन्न स्रोतों से जानकारी मिली कि जकात फांउडेशन को आतंकवाद से संबंध रखने वाले विभिन्न संगठनों से धन मिला.’

उल्लेखनीय है कि 15 सितंबर को उच्चतम न्यायालय ने अगले आदेश तक चैनल द्वारा ‘बिंदास बोल’ के एपिसोड का प्रसारण करने पर रोक लगा दी थी. न्यायालय ने कहा कि प्रथमदृष्टया लगता है कि कार्यक्रम के प्रसारण का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को ‘बदनाम’ करना है. सुदर्शन न्यूज चैनल द्वारा निदेशक एवं संपादक सुरेश चव्हाणके के जरिये दाखिल आवेदन में कहा ‘‘यह सम्मानपूर्वक बताया गया कि वर्तमान मामला जनता के विषय में सबसे महत्वपूर्ण मामलों में से एक है, क्योंकि भारत के संविधान के अनुच्छेद 19 (1) (ए) द्वारा संरक्षित प्रेस की स्वतंत्रता का प्रश्न इसमें शामिल है.’’

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