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दिल्ली का अलग धर्म की लड़की से प्यार करने वाले दलित युवक की हत्या, क्या है पूरा मामला

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दिल्ली के आदर्श नगर इलाक़े की एक पतली गली में मीडिया का जमावड़ा है. एक टीवी चैनल का एंकर कैमरा की ओर देखते हुए कहता है, “राहुल राजपूत की हत्या पर सेक्युलर लोग शांत हैं.”

अंदर तीन छोटे-छोटे कमरों के एक पुराने बने घर के एक कमरे में रिश्तेदार बैठे हैं, एक में मां मीडिया से बात कर रही है. जिस कमरे में बैठकर राहुल बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे, वहां दीवार से लगकर बैठे उसके पिता संजय कुमार गुमसुम हैं.

इससे पहले की मैं उनसे कोई सवाल कर पाता उन्होंने कहा, “हम राजपूत नहीं है, अनुसूचित जाति से हैं, मीडिया में सुबह से हमारे बेटे का नाम गलत लिया जा रहा है.”

18 साल का राहुल ओपन स्कूल से बीए की पढ़ाई कर रहा था. वो अपने घर में ही बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था. क्लास लेने भी जाता था. 7 अक्तूबर की शाम सात बजे के करीब उसे कुछ युवकों ने इतनी बुरी तरह से पीटा कि घर लौटने के कुछ घंटे बाद ही उसने दम तोड़ दिया.

राहुल की अपने घर से करीब एक किलोमीटर दूर जहांगीरपुरी की झुग्गी में रहने वाली एक मुसलमान लड़की से दोस्ती थी. जिन युवकों ने उस पर हमला किया वो उस लड़की के भाई और उनके दोस्त थे. पुलिस ने इस मामले में अब तक पांच लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें से तीन नाबालिग हैं.

कोचिंग में दोस्ती

राहुल के पिता टैक्सी ड्राइवर हैं और मां भी एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करती हैं. उसके पिता कहते हैं, “हमारा बेटा बच्चों को ट्यूशन पढ़ाता था. वो सिविल सेवा की तैयारी करना चाहता था. जब हम उससे कहत थे कि हम उस पर जितना जरूरी होगा पैसा खर्च करेंगे तो वो हमेशा ये ही कहा करता था कि वो खुद ही अपना खर्च उठाएगा.”

घर में कोचिंग शुरू करने से पहले राहुल घर के पास ही एक एनजीओ में अंग्रेज़ी की क्लास लेने जाता था. उस लड़की से उसकी दोस्ती यहीं हुई थी. वो भी यहां क्लास लेने आती थी.

राहुल के पिता कहते हैं, “हमें उसकी दोस्ती के बारे में कोई जानकारी नहीं थी, और अगर दोस्ती थी भी तो इसमें ऐसा क्या था कि हमारे बेटे की पीट-पीट कर हत्या ही कर दी. अगर उन्हें इससे नाराज़गी थी तो हमारे घर आते और इस बारे में बात करते.”

सात अक्तूबर की शाम को क्या हुआ था?

राहुल के पिता संजय कुमार ने सात अक्तूबर के घटनाक्रम के बारे में बताते हुए बीबीसी से कहा, “मैं और पत्नी दोनों काम पर बाहर थे. मेरी बेटी ने फोन करके बताया था कि भाई की तबियत खराब हो रही है आप जल्द घर आ जाइए. उसके हाथ-पैर ठंडे पड़ रहे हैं, मैंने कहा कि आप उसे डॉक्टर को दिखाओ तब तक मैं आता हूं.”

संजय कहते हैं, “बाद में मुझे पता चला कि उसे फोन करके बुलाया गया था. उससे कहा गया था कि ट्यूशन के लिए बात करनी है, इस बहाने उसे बुलाकर बाहर दूसरी गली में ले जाकर उसके साथ मारपीट की गई.”

वो बताते हैं, “राहुल घर आ गया था, हमें लगा कि हल्की-फुल्की तबियत ख़राब है, डॉक्टर को दिखाकर सब ठीक हो जाएगा. लेकिन उसकी तबियत खराब होती चली गई, जब हम उसे अस्पताल लेकर गए तो उसकी मौत हो गई.”

वो बताते हैं, “हमें बताया गया है कि सात-आठ लोगों ने उसे बुरी तरह पीटा, लेकिन पुलिस ने अभी पांच ही लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि अगर इस घटना में और लोग भी शामिल होंगे तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा.”

इस घटना का एक सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है जिसमें राहुल उस लड़की के साथ जाता दिख रहा है जिससे उसकी दोस्ती थी.

दिल्ली पुलिस का कहना है कि ये वीडियो घटना से कुछ देर पहले का ही है. अब तक की पुलिस जांच में पता चला है कि राहुल को फोन करके बुलाया गया था और उसके बाद उसके साथ मारपीट की गई थी.

राहुल के परिजनों ने तुरंत पुलिस को कॉल क्यों नहीं की?

राहुल के पिता का कहना है कि जब वो घर आया था तब उसकी हालत ऐसी नहीं लग रही थी कि उसकी मौत ही हो जाएगी.

वो कहते हैं, “हमें भी अंदाज़ा नहीं था कि ऐसा हो सकता है. हमें लगा था कि बच्चे हैं, आपस में लड़ गए होंगे. अब ऐसी बातों पर कोई तुरंत पुलिस को थोड़े ही बुलाता है. हमने इतनी गंभीरता से नहीं लिया था. हमें लगा था कि तबियत ठीक नहीं है पहले दवा दिला लेते हैं.”

राहुल के परिजनों ने उसकी मौत के बाद ही थाने में जाकर एफ़आईआर दर्ज कराई थी. हालांकि परिजनों का ये भी कहना है कि पुलिस शुरुआत में एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी.

राहुल अपने मां-बाप का इकलौटा बेटा था. उसकी मां कहती हैं, “वो पढ़ने में बहुत अच्छा था और आसपास के बच्चों को फ्री में भी पढ़ाता था. वो पढ़ाई के अलावा किसी तरह की बात नहीं करता था.”

क्या कभी राहुल ने उस लड़की के बारे में अपने परिजनों से बात की थी, इस सवाल पर उसकी मां कहती है, “उसने कभी किसी लड़की के बारे में घर में बात नहीं की थी. वो लड़की उसे क्लास में मिली थी, अगर दोनों की दोस्ती भी थी तो इसमें गलत क्या है आजकल बच्चों की दोस्ती हो जाती है.”

अभियुक्तों के मुसलमान होने की वजह से इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशें भी की गई हैं, क्या राहुल पर हमले की वजह उसका हिंदू होना भी हो सकती है, इस सवाल पर उसके पिता कहते हैं, “अगर मारने वाले हिंदू होते तब भी वो उनके लिए वही सज़ा मांगते जो मुसलमान हमलावरों के लिए मांग रहे हैं.”

वो कहते हैं, “इसमें हिंदू-मुसलमान कोई मुद्दा नहीं है, मुद्दा ये है कि एक नौजवान लड़के को सिर्फ एक लड़की से दोस्ती होने की वजह से मारा गया है. ये घटनाएं कब तक होती रहेंगी?”

राहुल के पड़ोसी दिनेश शर्मा कहते हैं, “इस इलाके में इस तरह की घटना पहले नहीं हुई है, एक नौजवान को इस तरह मारा गया है, इस मामले में त्वरित सुनवाई होनी चाहिए ताकि आगे ऐसी घटना ना हो.”

वो कहते हैं, “दिल्ली अभी दंगों के दंश से उभरी भी नहीं है, यदि ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई ना हुई और इंसाफ न मिला तो तनाव भड़काने वाले लोग ऐसी घटनाओं पर भी तनाव भड़का सकते हैं.”

शनिवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और सरकार की ओर दस लाख रुपये की आर्थिक मदद दिलाने का भरोसा दिया.

वहीं राहुल के पिता संजय कुमार कहते हैं, “किसी भी स्तर की आर्थिक मदद उनके जख्मों को नहीं भर सकती है. मेरा इकलौता बेटा था, असमय चला गया है. हम किसी भी कीमत पर उसके लिए इंसाफ चाहते हैं. जो भी इस घटना में शामिल है बचना नहीं चाहिए.”

क्या कहना है अभियुक्तों के परिजनों का?

पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें तीन नाबालिग हैं. राहुल के घर से कोई एक किलोमीटर दूर जहांगीरपुरी की झुग्गियों में लड़की का परिवार एक किराए की झुग्गी में रहता है.

लड़की के एक भाई मोहम्मद राज को गिरफ्तार किया जा चुका है. अभी घर में उसके एक नाबालिग भाई के सिवा कोई नहीं है. ये युवती भी ओपन स्कूल के जरिए बीए की पढ़ाई कर रही थी. वो एक एनजीओ में इंग्लिश स्पीकिंग सीखने जाती थी जहां उसकी मुलाकात राहुल से हुई थी.

उसका नाबागिल भाई गुमसुम है. वो आंखों में आंसू भरकर कहता है, “आसपास के लोग मेरी बहन के बारे में बहुत गलत-गलत बातें कर रहे हैं, आप इनसे कहिए कि ऐसी बातें ना करें.”

गिरफ्तार किए गए तीन नाबालिग लड़कों के घर भी यहां आसपास ही हैं. ये सब 11वीं-12वीं के छात्र थे, लॉकडाउन और स्कूल बंद होने की वजह से ये इन दिनों पढ़ाई नहीं कर पा रहे थे.

राहुल की हत्या में शामिल सभी लड़के छात्र हैं और 11वीं-12वीं में पढ़ रहे थे

इनमें से एक संयुक्त परिवार एक इतने छोटे कमरे में रहता है कि एक तख्त बिछाने के बाद कुछ और बिछाने लायक जगह नहीं बचती. यहीं एक स्लैब डालकर रसोई बना ली गई है जिस पर खाना बनता है. उसके दो भाई मज़दूर हैं.

वो कहते हैं, “इस घटना के बाद से उनके नाबालिग भाई की ज़िंदगी बर्बाद हो गई है.” वो कहते हैं, “वो ऐसा लड़का नहीं था कि किसी पर हमला करे. उसे अपनी पढ़ाई के अलावा किसी और बात से मतलब नहीं था. हमें नहीं पता कि वो कैसे उन लड़कों के साथ चला गया.”

ऊपर रैक पर रखी उसकी किताबों को दिखाते हुए उसकी बहन कहती है, “अब तो उसकी ज़िंदगी ही बर्बाद हो गई है. हमारे पास इतने पैसे भी नहीं है कि उसके लिए वकील कर पाएं.”

गिरफ्तार किए गए बाकी दो लड़कों की माएं भी वहीं खड़ी सुबक रहीं थीं, उनमें से एक बात करने की स्थिति में नहीं थी जबकि दूसरी कहती है, “पढ़ने लिखने वाला लड़का था, पता नहीं कैसे वहां चला गया और इतनी बड़ी घटना हो गई, हमें नहीं पता कि आगे क्या करना है. अब तो हमारी जिंदगी में अंधेरा ही अंधेरा है.”

इधर, जहांगीरपुरी में इन माओं को अपने बेटों की रिहाई की फिक्र है और उधर, आदर्श नगर में अपने घर में सुबक रही राहुल की मां अपने बेटे के क़ातिलों के लिए सख्त से सख्त सज़ा की मांग कर रही हैं. (इशाकत खान इंडिया सावधान न्यूज़ दिल्ली)

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