Mon. Jan 25th, 2021

इंडिया सावधान न्यूज़

राष्ट्र की तरक्की में सहयोग

सीएए विरोधी आंदोलन में हुआ था गिरफ्तार, 9 महीने बाद हुआ रिहा; कानूनी लड़ाई से कर्जे में डूबा परिवार

1 min read

यूपी नागरिकता संशोधन कानून के तहत पिछले साल देश भर में शुरू हुए आंदोलन के दौरान लखनऊ में गिरफ्तार हुए ऑटो चालक अब्दुल तौसीफ नौ महीने बाद जब छूटकर घर आया तो पूरा परिवार कर्जे में डूबा मिला। उसकी रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई लड़ने में पूरा परिवार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है। अब जब तौफीक की जमानत हो गई है और वह जेल से बाहर आ गया है, लेकिन घर की कुर्की करने का नोटिस आ गया है। इससे वह परेशान हैं।

तौसीफ के मुताबिक नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हुए आंदोलन में वह शामिल नहीं था। घटना के समय वह अपने ननिहाल में था। उसने बताया कि अचानक एक दिन उसके घर पुलिस पहुंची और उसके बारे में पूछताछ की। घर वालों ने बताया कि वह ननिहाल में है तो पुलिस वालों ने कहा उसको सरेंडर कराओ। उसके खिलाफ मामला है। पुलिस उसके बड़े पापा के बेटे को उठा ले गई। पुलिस ने शाम को घर पर फोन कर कहा कि तौसीफ को भेज दो उसको छोड़ देंगे।

तौसीफ के पिता के मुताबिक अब घर चलाने के लिए कोई चारा नहीं बचा है। तौसीफ का कहना है कि वह अब केस खत्म होने का इंतजार कर रहा है। वह खत्म हो जाए तो वह अरब जाकर कुछ कमाए और घर का कर्ज चुका सके। तौसीफ ने आरोप लगाया कि पुलिस बेकसूर नौजवानों को जेल भेजकर उनका भविष्य खराब कर रही है। तौसीफ ने बताया कि जेल में अपराधियों के बीच रखने से वह रात-रात भर रोता था। परिवार वाले उसकी रिहाई के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। इस दौरान घर की सारी आमदनी बंद हो गई और परिवार भुखों मरने की कगार पर पहुंच गया है।

तौसीफ के मुताबिक पुलिस दो दिन तक हिरासत में रखकर उसका टार्चर की और जबरन उससे आंदोलन में शामिल लोगों का नाम बताने को कहा। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया। तौसीफ ने बताया कि पुलिस ने उसे फर्जी आरोप में नौ महीने जेल में रखा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *