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मुफलिसी का सितम! रोटी की जुगाड़ का तकाजा

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एमपी भोपाल मुफलिसी का सितम! रोटी की जुगाड़ का तकाजा मुफलिसी का सितम, रोटी की जुगाड़ का तकाजा और घर चलाने की मजबूरी। ऐसे में आदिवासी मजदूर दीपक मरावी ने 750 रुपए के लालच में कोविड का टीका लगवा लिया। मकसद था कि इन रुपयों से घर में दो-तीन दिन तक की दाल-रोटी का जुगाड़ हो जाएगा।

दीपक ने सोचा भी नहीं होगा कि उसका यह कदम भारी पड़ेगा। इसके बाद उसकी ऐसी तबीयत बिगड़ी कि 10 वें दिन (21 दिसंबर) उसकी मौत हो गई। टीला जमालपुरा की सूबेदार कॉलोनी में पांडेजी की संकरी गली में रहने वाले दीपक के घर मातम है। वह यहां किराए से रहता था। मुश्किल से 10 बाय 12 के कमरे में उसका पूरा परिवार रहता है। जरूरत के सामान के नाम पर कुछ बर्तन और बिस्तर हैं। पत्नी वैजयंती (38) का पति दीपक के गम में बुरा हाल है।

घर में 21 दिसंबर से खाना नहीं बना है। पड़ोसी ही दीपक के यहां खाना भेज रहे हैं। वैजयंती को चिंता है कि वो गृहस्थी का बोझ कैसे उठा पाएगी। खुद गैस पीड़ित होने के साथ श्वांस रोगी है। उसने सोच रखा है कि वो लोगों के घर में झाड़ू-पोंछा करके रोटी का तो जुगाड़ कर लेगी। तीन बच्चे सूरज (20), आकाश (17) और पवन (10) है। इनमें सूरज और आकाश शिक्षित नहीं है। पवन के दिल में छेद है, इसलिए वह चल फिर नहीं सकता।

वैजयंती के मुताबिक कि पीएम हुआ, लेकिन हमें रिपोर्ट लेने के लिए कई बार चक्कर लगाना पड़े। आखिर 7 जनवरी को पीएम रिपोर्ट मिली। वैजयंती एवं उसके बेटे आकाश का आरोप है कि जब पीएम हो रहा था, तब पीपुल्स के डॉक्टर मोर्चरी के अंदर थे। उन्होंने रिपोर्ट में कुछ हेरफेर कराया है, ताकि सच सामने न आ सके।

वैजयंती का कहना है कि भले ही रुखी-सूखी खाते थे, लेकिन मेरे पति स्वस्थ थे। वजनी चीजें उठा लेते थे। उन्हें मजदूरी का काम मिलता था। गुजर बसर ठीक चल रही थी। उन्होंने ने बताया कि कलेक्टर ने 25 हजार का चैक भिजवाया है। लेकिन बैंक में खाता नहीं है। अब खाता खुलवाऊंगी।

वहीं बेटे आकाश की मानें तो पिताजी को पीठे पर पता लगा था कि वैक्सीन लगवाने पर 750 रुपए मिलेंगे। घर में ये बात उन्होंने सिर्फ छोटे बेटे पवन को बताई थी। तबीयत बिगड़ने पर इलाज का खर्च नहीं होने के कारण वैक्सीन लगवाने के बाद वे अस्पताल नहीं गए।

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