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यूपी: उन्नाव में सब्ज़ी विक्रेता किशोर के सिर में चोट लगने से हुई मौत: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट

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घटना बीते 21 मई की शाम उत्तर प्रदेश उन्नाव ज़िले के बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र में हुई. सब्ज़ी विक्रेता फैसल हुसैन को पुलिस कोरोना कर्फ्यू के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया था. मृतक के परिजन का आरोप है प्रभारी निरीक्षक के सामने फैसल को पीट-पीट कर मार डाला गया.

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में अपने घर के बाहर सब्जी बेच रहे एक किशोर की कोरोना कर्फ्यू के उल्लंघन को लेकर पुलिस की कथित पिटाई और प्रताड़ना के बाद मौत को लेकर हुए पोस्टमॉर्टम में पता चला है कि सिर में चोट लगने की वजह से सब्जी विक्रेता की मौत हुई है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक बांगरमऊ पुलिस स्टेशन के सीसीटीवी में दिख रहा है कि फैसल हुसैन (18) को कुछ अज्ञात लोगों द्वारा घसीट कर लाया जा रहा है. वे बार-बार गिर जा रहे हैं. हालांकि ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हुसैन को पुलिस स्टेशन में लाया जा रहा है या यहां से कहीं और ले जाया जा रहा है.
इस मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत केस दर्ज किया गया है, जिसमें कॉन्स्टेबल विजय चौधरी और सीमावत तथा होमगार्ड सत्यप्रकाश आरोपी हैं. प्राथमिकी में मृतक के परिजन का आरोप है प्रभारी निरीक्षक के सामने किशोर को पीट-पीट कर मार डाला गया.
परिजनों ने कहा था कि 18 वर्षीय सब्जी विक्रेता फैसल हुसैन को पुलिस ने कथित तौर पर दोपहर में बाजार से शुक्रवार हिरासत में लिया था और उन्हें इतना पीटा गया कि उनकी मौत हो गई.
ये पूछे जाने पर कि क्या किसी की गिरफ्तारी हुई है, उन्नाव के पुलिस अधीक्षक आनंद कुलकर्णी ने कहा, ‘हमारे समक्ष प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों के आधार पर हम कार्रवाई करेंगे.’
कुलकर्णी ने सीसीटीवी फुटेज की पुष्टि की और कहा कि कान के पास चोट लगने की वजह से अंदरूनी खून बहा था. उन्होंने कहा, ‘हम मेडिको-लीगल सलाह लेंगे और उसके अनुसार जांच करेंगे.’
पुलिस ने शुरू में ये दावा किया था कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि हुसैन की मौत हार्ट अटैक के चलते हुई है. हालांकि बाद में जब परिजनों एवं स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया और युवक के शव को लेकर हाईवे जाम कर दिया, उसके बाद कॉन्स्टेबल और होम गार्ड के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.
कुलकर्णी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘वीडियो में स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि जब वे पुलिस स्टेशन आते हैं तो वे गिर पड़ते हैं. उन्हें फिर उठाया जाता है, लेकिन वे फिर गिर पड़ते हैं. इसके बाद कुछ पुलिसकर्मी उन्हें पानी देते हैं. ये पूरी घटना सीसीटीवी फुटेज में रिकॉर्ड है. इस बीच परिवार के कुछ लोग आते हैं.’
एसपी ने आगे कहा, ‘सीसीटीवी फुटेज में मैंने ये भी देखा है कि पुलिसवाले व्यक्ति की दुकान पर उन्हें थप्पड़ मार रहे हैं. उन्होंने डंडे या किसी और चीज से उन्हें नहीं मारा है.’
हालांकि परिजनों ने कहा है कि प्रत्यक्षदर्शियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि पुलिसवालों ने बिना किसी कारण के हुसैन को पकड़ लिया, बर्बर तरीके से पीटा और मोटरसाइकिल से थाने ले गए.
शिकायत में कहा गया है, ‘जब परिवार के लोग पुलिस स्टेशन पहुंचे, उन्हें अस्पताल ले जाया गया था और ऐसे ही छोड़ दिया गया. पुलिसवाले वहां से भाग गए थे.’
परिवार का दावा है कि विजय चौधरी और सत्यप्रकाश ने 18 वर्षीय व्यक्ति को उठा लिया था और कॉन्स्टेबल सीमावत उन्हें स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले गए थे.
सर्किल ऑफिसर (बंगारमऊ) आशुतोष कुमार ने कहा कि ‘कोरोना कर्फ्यू’ के उल्लंघन को लेकर उन्हें कई शिकायतें मिली थी, जिसकी जांच करने के लिए वहां पुलिस कई थी और इसी कार्रवाई के दौरान फैसल को गिरफ्तार किया गया था.(इशाकत खान पत्रकार)

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